Wednesday, June 24, 2015

प्रश्न ये है कि

प्रश्न ये नहीं कि तुम सोये थे कि नहीं, 
प्रश्न ये है कि तुम जागे कब थे?
प्रश्न ये नहीं कि तुम गुणवान हो या नहीं, 
प्रश्न ये है कि तुमने अवगुण त्यागे कब थे?

प्रश्न ये नहीं कि तुम न्यायप्रिय हो कि नहीं ,
प्रश्न ये है कि तुम इन्साफ के लिए लड़े कब थे?
प्रश्न ये नहीं कि तुम परमार्थ में लगे हो या नहीं, 
प्रश्न ये है कि तुम अपनों के साथ खड़े कब थे?

प्रश्न ये नहीं कि तुमने धन कमाया है या नहीं, 
प्रश्न ये है कि तुमने इज्ज़त कमाई कब है?
प्रश्न ये नहीं कि लज्जा तुम्हें आती है या नहीं, 
प्रश्न ये है कि तुमने लाज बचाई कब है?

प्रश्न ये नहीं कि देश के लिए क्यों नहीं लड़े,
प्रश्न ये है कि माँ ने आदमी जने कब थे?
प्रश्न ये नहीं कि पैदा तुम आदमी हुए हो या नहीं, 
प्रश्न ये है कि तुम आदमी बने कब थे?

प्रश्न ये नहीं कि ज़िन्दगी में कभी गिरे हो या नहीं, 
प्रश्न ये है कि गिरकर तुम उठे कब थे?
प्रश्न ये नहीं कि ईश होता है या नहीं, 
प्रश्न ये है कि उसके ध्यान में तुम बैठे कब थे?

प्रश्न ये नहीं कि मकान तुमने कितने बनाये है, 
प्रश्न ये है कि घर तुमने बनाये कब थे?
प्रश्न ये नहीं कि तुम जीत पाओगे या नहीं, 
प्रश्न ये है कि तुमने भीतर के शत्रु हराए कब थे?

                                                        --- देवानांप्रिय प्रियदर्शी