Tuesday, December 25, 2012

राजनीति के देव, अटल

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के 89 वें जन्मदिवस पर मेरी पहली काव्य रचना के रूप में एक भेंट -- 

होश संभलते  ही 
भारत को उन मजबूत हाथों में देखा 
आभास हुआ हर कृष्ण मेघ की 
होती है एक रजत रेखा।

प्रखरबुद्धि, मुखरवाणी, 
हर जन जिसका श्रोता है 
बताया, कि "मौन रहने से नहीं", 
बोलने से बहुत कुछ होता है 

गठबंधन को बंधन
न बनने देने की कला 
बंधने दोस्ती के रिश्ते में 
एकाकी वो सड़क से पाकिस्तान चला 

कविमन राजयोगी राजनीतिज्ञ ऐसा वह 
राजधर्म का पाठ पढ़ाया 
धर्मांध राजनीति के शिखर पे रहकर 
निरपेक्ष कैसे हों, ये दिखलाया 

रत्न मिले न मिले, 
भारत के शीर्ष रतन हैं 
योगदान जिनका है अतुल्य 
कृतज्ञ आज वतन है।

राष्ट्र ही नहीं संयुक्त राष्ट्र में 
हिंदी का परचम लहराकर 
विस्फोट शब्दों का और बमों का 
पोखरण में करके दिखलाकर 

विश्वपटल पर भारत की छवि को 
चमकाने में हुए सफल 
नाम मुताबिक़ कार्य शैली के 
राजनीति के देव, अटल।।

                                         --- देवानांप्रिय प्रियदर्शी ----

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